ज़िंदगी रोज नये रंग मे ढलती है,

ज़िंदगी रोज नये रंग मे ढलती है,
कभी दुश्मन कभी दोस्त लगती है,
कभी बरस जाए घटा बे मौसम,
कभी बूँद-बूँद को तरसती है