पुराना साल सबसे हो रहा है दूर

पुराना साल सबसे हो रहा है दूर, क्या क्रेंम यही है कुदरत का दस्तूर!
पुराने जाते हैं नये आते हैं, फिर वो भी गुमनामियों में खो जाते हैं!
नये साल में क्यों न जाये खुशियों में झूम, मिलके मनाये सारे धूम!
नया साल मुबारक हो!