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मेरे मिज़ाज को समझने के लिए, बस इतना ही काफी है, मैं उसका हरगिज़ नहीं होता….. जो हर एक का हो जाये।
दुनिया है छोटी, हम है मुसाफ़िर, कहीं न कहीं तो फिर से मुलाकात होगी.:)
दुख तो अपने ही देते हैं वरना गैरों को कैसे पता की हमें तकलीफ किस बात से होती है…..
दुआ कभी खाली नही जाती, बस लोग इंतजार नही करते..
बचपन से बादाम खा रहा हू । तुझे भूलाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
जरा देखो तो ये दरवाजे पर दस्तक किसने दी है, अगर ‘इश्क’ हो तो कहना, अब दिल यहाँ नही रहता..
लो..बदल गया मिजाज-ऎ-मौसम…. हुबहू तुम्हारी तरह..!!!।
तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता !!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं !
आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर……अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।